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शाहरुख को लेकर आज भी मेरे अंदर एक्साइटमेंट है और वो हमेशा बनी रहेगी: राजकुमार राव

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पूजा-पाठ करते समय भक्त का मुख किस दिशा में रहना शुभ होता है? #wanitaxigo

आराम वाले काम को छोड़कर जोखिम लेने के बाद ही कोई बड़ी सफलता मिल सकती है #wanitaxigo

Utthana Ekadashi – Dev Prabodhini - Importance of Dev Uthani Gyaras - Hari Prabodhini Ekadashi

Utthana Ekadasi, or Prabodhini Ekadashi, (also known as Dev Uthani Ekadasi and Hari... [Visit original source www.hindu-blog.com to read the entire content and more such articles.] from Hindu Blog https://ift.tt/1QzaWR7

Bhuta Chikitsa In Hinduism – Driving Away Evil Spirits

In Hinduism, Bhuta Chikitsa is the driving away of evil spirits from a person or a place.... [Visit original source www.hindu-blog.com to read the entire content and more such articles.] from Hindu Blog https://ift.tt/330JTYu

पूजा-पाठ करते समय भक्त का मुख किस दिशा में रहना शुभ होता है?

जीवन मंत्र डेस्क। रोज सुबह-शाम नियमित रूप से पूजा-पाठ करने से घर में सकारात्मकता बनी रहती है। मन के नकारात्मक विचार नष्ट होते हैं। इसी वजह से घर में मंदिर बनाने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए कुछ ऐसी बातें, जो घर के मंदिर ध्यान रखनी चाहिए... घर में पूजा करने वाले का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होगा तो बहुत शुभ रहता है। इसके लिए पूजा स्थल का द्वार पूर्व की ओर होना चाहिए। इस दिशा के अलावा पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा में होगा तब भी श्रेष्ठ फल प्राप्त हो सकते हैं। घर में मंदिर ऐसे स्थान पर बनाए, जहां दिनभर में कभी भी थोड़ी देर के लिए ही सही, लेकिन सूर्य की रोशनी अवश्य पहुंचती हो। जिन घरों में सूर्य की रोशनी और ताजी हवा आती रहती है, उन घरों के कई वास्तु दोष शांत हो जाते हैं। सूर्य की रोशनी से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है। मंदिर में मृतकों और पूर्वजों के चित्र लगाने से बचना चाहिए। पूर्वजों के चित्र लगाने के लिए दक्षिण दिशा श्रेष्ठ रहती है। घर में दक्षिण दिशा की दीवार...

आराम वाले काम को छोड़कर जोखिम लेने के बाद ही कोई बड़ी सफलता मिल सकती है

जीवन मंत्र डेस्क। एक पुरानी प्रचलित कथा के अनुसार एक राजा अपने पड़ोसी राज्य में यहां घूमने गया। पड़ोसी राजा ने खूब अच्छी तरह मेहमान राजा की मेजबानी की। कुछ दिन वहां रहने के बाद राजा अपने राज्य में लौटने लगा तो पड़ोसी राजा ने उसे दो सुंदर कबूतर उपहार में दिए। राजा उन दोनों कबूतरों के लेकर अपने महल में आ गया। वहां एक सेवक को कबूतरों की देखभाल में नियुक्त कर दिया। सेवक सुबह-शाम कबूतरों के लिए दाना-पानी का इंतजाम कर देता। कुछ दिन बाद जब राजा उन कबूतरों का हाल जानने पहुंचा। सेवक ने बताया कि एक कबूतर तो बहुत ऊंचाई तक उड़ता है, लेकिन दूसरा पेड़ की एक शाखा पर ही बैठा रहता है। ये जानकर राजा को बहुत दुख हुआ कि दूसरा कबूतर उड़ क्यों नहीं रहा है। राजा ने तुरंत अपने मंत्रियों को बुलवाया, लेकिन कोई भी ये नहीं समझ पा रहा था कि दूसरे कबूतर को क्या हुआ है। तभी किसी ने राजा को सलाह दी कि पक्षियों के जानकार को बुलवाना चाहिए। मंत्रियों ने तुरंत ही एक गरीब को किसान को बुलवा लिया। किसान पक्षियों का जानकार था, उसने कबूतर के आसपास का क्षेत्र देखा और जिस पेड़ की शाखा पर वह बैठा रहता था, वह शाखा ही काट ...

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