
- शनिदेव के पिता सूर्यदेव और माता छाया हैं। शनि के भाई-बहन यमराज, यमुना और भद्रा हैं। शनि के छोटे भाई यमराज मृत्यु के देवता हैं, यमुना नदी को पवित्र और पापनाशिनी माना गया है। भद्रा क्रूर स्वभाव मानी गई है और अशुभ फल देने वाली बताई गई है।
- शनि का रंग श्याम वर्ण माना गया है और वे नीले वस्त्र धारण करते हैं।
- हर शनिवार को शनि के लिए ध्यान मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। मंत्र -
छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
- शनि का जन्म क्षेत्र सौराष्ट क्षेत्र में शिंगणापुर माना गया है। इनकी जन्म तिथि अमावस्या है। इसी वजह से हर माह की अमावस्या पर शनि का विशेष पूजन किया जाता है।
- शनि ने शिव को अपना गुरु बनाया और तप से शिव को प्रसन्न किया था। इसके बाद शनि को न्यायाधीश का पद मिला।
- शनि का स्वभाव क्रूर, गंभीर, तपस्वी, महात्यागी माना जाता है। शनिदेव को कोणस्थ, पिप्पलाश्रय, सौरि, शनैश्चर, कृष्ण, रौद्रान्तक, मंद, पिंगल व बभ्रु नामों से भी जाने जाते हैं।
- हनुमानजी, भैरवनाथ, बुध और राहु को शनि का मित्र माना जाता है। इसीलिए इनकी पूजा से शनि दोष दूर हो सकते हैं।
- शनि की प्रसन्नता के लिए काले रंग की वस्तुएं जैसे काला कपड़ा, तिल, उड़द, लोहे का दान करना चाहिए। शनि को गुड़, खट्टे पदार्थ और तेल चढ़ाने की परंपरा है।
- शनि के अशुभ असर से बचने के लिए हमें गलत कामों से बचना चाहिए। कभी भी किसी गरीब का अनादर न करें। माता-पिता और अन्य बड़े लोगों का सम्मान करें। ईमानदारी से काम करते रहेंगे तो शनि की वजह से परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। जो लोग गलत काम करते हैं, उन्हें शनि की साढ़ेसाती और ढय्या में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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