Skip to main content

पति-पत्नी के रिश्ते में गंभीरता के साथ जरूरी है कुछ हंसी-मजाक भी

जीवन मंत्र डेस्क. पति-पत्नी का रिश्ता सबसे संवेदनशील होता है। ये ऐसा रिश्ता है, जिसमें गलती की थोड़ी भी गुंजाइश नहीं है क्योंकि ये पूरी तरह विश्वास और आपसी समझ पर टिका रिश्ता है। आमतौर पर इस रिश्ते में लोग शुरुआत तो उत्साह के साथ करते हैं लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ ये सामान्य रिश्तों की तरह हो जाता है। गृहस्थी की गंभीर बातों में इस रिश्ते का रस सूखता जाता है। दाम्पत्य में रिश्ते को हमेशा ऊर्जावान रखने के लिए पति-पत्नी के बीच हास-परिहास होना भी जरूरी है।

भागवत में एक प्रसंग है, एक दिन रुक्मिणीजी ने श्रीकृष्ण से पूछा कि आपने मुझसे विवाह क्यों किया? रुक्मिणीजी सुंदर थीं, उनका परिवार भी धनी था। श्रीकृष्ण ने समझ लिया कि रुक्मिणी में इस बात का अहंकार आ गया है। उन्होंने जवाब में कहा कि सही है देवी, मैं कहां आपके लायक था। सारा जीवन दौड़ते-भागते निकल रहा है। चारों ओर से शत्रुओं से घिरा हूं। जब से पैदा हुआ हूं, कोई ना कोई बिना किसी कारण मुझसे युद्ध करने चला आता है। मैं कहां आपके लायक था बड़ी मुश्किल से राज्य और परिवार को चला रहा हूं। आपका अहसान है कि आपने मुझसे विवाह कर लिया।


श्रीकृष्ण की ये बातें सुनकर रुक्मिणीजी शर्म से पानी-पानी हो गईं। माफी मांगने लगीं। तब भगवान ने कहा कि नहीं देवी, माफी की जरूरत नहीं है, मैं तो सिर्फ हास्य विनोद के लिए ऐसा कह रहा था।


इस प्रसंग में भगवान का यही संदेश है कि अपने जीवन साथी से हास्य-विनोद करते रहना चाहिए। वैवाहिक जीवन में अनेक निर्णय, अनके स्थितियां ऐसी आती हैं कि जब अकारण ही तनाव आ जाता है। तनाव दूर करने के लिए पति-पत्नी को कभी-कभी एक दूसरे को हंसाने का प्रयास करते रहना चाहिए।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Lord Krishna Bhagwat srimad bhagwat In a husband-wife relationship, it is important to have some laughter and fun.


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2FVpg5Y

Comments

Trending

Health

Popular posts from this blog

तीज-त्योहार:करवा चौथ के बाद 28 अक्टूबर को संतान की लंबी उम्र के लिए अहोई अष्टमी और अगले दिन रहेगा राधाष्टमी व्रत

अष्टमी तिथि दो दिन होने से पहले अहोई अष्टमी और अगले दिन राधाष्टमी मनाई जाएगी from जीवन मंत्र | दैनिक भास्कर https://ift.tt/3B9nXut

दोस्त की मदद करने में कभी पीछे न हटें:रामायण में श्रीराम के मित्र थे सुग्रीव और निषादराज, महाभारत में श्रीकृष्ण के मित्र थे अर्जुन, द्रौपदी और सुदामा

from जीवन मंत्र | दैनिक भास्कर https://ift.tt/mPIr0Nl