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इंसानी कोशिका को पूरी तरह घेरकर उसमे घुस जाता है कोरोनावायरस, 20 लाख गुना बड़ा करके उतारी तस्वीरों से पता चला

अमेरिका और ब्राजील के दो संस्थानों ने कोविड-19 फैलाने वाले कोरोनावायरस SARS-COV-2 की स्पष्ट तस्वीरें उतारे में सफलता पाई हैं। इन तस्वीरों को इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोस्कोप की मदद से उतारा गया है। इसके लिए माइक्रोस्कोप में वायरस के संक्रमण की स्थिति को 20 लाख गुना बड़ा करके देखा गया जिसमें पता चला कि किस तरह से यह वायरस इंसानी कोशिका को पूरी तरह घेर लेता है और उसके अंदर घुस जाता है। इसके बार वायरसउसके ही जीवन रस औरप्रोटीन के साथ जुड़कर कोशिका कोनष्ट होने पर मजबूर करदेता है।

ये नईतस्वीरें अमेरिका के मैरीलैंड स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिसीज (एनआईएआईडी) इंटीग्रेटेड रिसर्च फैसिलिटी (आईआरएफ) फोर्ट फोर्ट्रिक, नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट(एनआईएच) और ब्राजील के ओसवाल्डो क्रूजफाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने अलग-अलग प्रयोगों के दौरान उतारी हैं। भारत में भी बीते महीनेनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के शोधकर्ताओं ने कोरोनावायरस की पहली तस्वीरें ली हैं।

वैज्ञानिकों नेट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करते हुए, लेंस की मदद से ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जिससे सैम्पल को बीस लाख गुना बढ़ाया जा सकता है। इसके लिएटीम ने सेल कल्चर बनाया और फिर कोशिकाओं को वायरस से संक्रमित होनेकी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से देखा और वायरस के संक्रमण के तरीके कोसमझा।

तस्वीरों से समझते हैं कोरोना वायरस और उसका आक्रमण

नए नोवलकोरोनावायरस (Sars-Cov-2) के चारों ओर एक ताज नुमा (क्राउन) संरचना है, जिसके कारण इसे कोरोना नाम दिया गया है। लैटिन में क्राउन का मतलब कोरोना होता है।नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के डिप्टी डायरेक्टर डॉ अतानु बसु के मुताबिक, कोरोनावायरस के एक कण काआकार 75 नैनोमीटर (एक मीटर का एक अरबवां हिस्सा)होताहै।

ये तस्वीर अमेरिका के मैरीलैंड स्थित रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ली है। स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोग्राफ तकनीक से ली गई इस रंगीन तस्वीर में इंसानी शरीर की एपोप्टोटिक कोशिका (बैंगनी रंग में) को SARS-COV-2 वायरस (पीले रंग में) बहुत अधिक संख्या में झुंड बनाकर आसपास से घेरे हुए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक एपोप्टोटिक कोशिकाएं सिंगल या एक समूह में होती है। ये ऐसी कोशिकाओं का वह रूप है जो वायरस से संक्रमित हो जाने के बाद खुद ही अपने अंदर डेथ प्रोग्राम शुरू कर लेता है और बहुत जल्दी ये खुद ही नष्ट हो जाती हैं।

हर एक कोशिका एक मेम्ब्रेन या झिल्ली में सुरक्षित होती है। 02 अप्रैल को पहली बार एक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप तस्वीर में SARS-CoV2 का पहला ब्लैक एंड व्हाइट फोटो उतारा गया। इसमें एक लाल रंग के तीर से समझाया गया है कि वायरस की सतह पर विशिष्ट ग्लाइकोप्रोटीन के तंतु होते हैं जो कोशिका को पकड़ने के काम आते हैं। इस तस्वीर में छोटे काले धब्बों के रूप में वायरस दिखाई दे रहे हैं।

SARS-COV-2 वायरस कोशिका के साइटोप्लाज्म यानी एक कोशिका के जीवनरस में संक्रमण प्रक्रिया शुरू करता है। साइटोप्लाज्म के अंदर ही कोशिका का केंद्र न्यूक्लिअस होता है, जो कोशिका की आनुवंशिक सामग्री को जमा करने के लिए जिम्मेदार होता है। जैसे ही वायरस संक्रमित कोशिका के अंदर घुसता है तो उसकी झिल्ली के अंदर ही तेजी से अपनी संख्या बढ़ाना शुरू कर देता है। इस चित्र में बांयी ओर एक सफेद कोशिका में गोल-गोल कोरोनावायरस साफ देखे जा सकते हैं।

इस तस्वीर में काले रंग के धब्बों के रूप में SARS-COV-2 वायरस के झुंड नजर आ रहे हैं। एक बार कोशिका में घुसने और उसके साइटोप्लाज्म को संक्रमित करने के बाद ये वायरस न्यूक्लिअस को निशाना बनाते हैं जिसमें जेनेटिक मटेरियल यानी डीएनए होता है। इससे कोशिका की पूरी कार्यप्रणाली नष्ट हो जाती है और कोशिका स्वयं को नष्ट करने का प्रोग्राम शुरू कर देती है। तस्वीर में V शेप में कुछ संरचनाए नजर आ रही हैं जो एंटीबॉडीज हैं। तीव्र संक्रमण की स्थिति में इन एंटीबॉडीज की संख्या में कम होने और क्षमतावान न होने के कारण ये वायरस का मुकाबला नहीं कर पाती हैं और शरीर में संक्रमण तेजी से फैलता है, जिससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है और उसे वेंटीलेटर पर ले जाना पड़ता है। इसके बाद जीवन रक्षक मशीनों,दवाओं और मरीज की खुद कीइम्यूनिटी की भूमिका अहम होती है।



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Corona virus completely engulfs human cell, 20 million times larger than photos revealed


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