Skip to main content

रात में बार-बार नींद का टूटना और कवरटें बदलते रहना है स्लीप एपनिया का लक्षण, सुबह सिर में दर्द महसूस हो दिन में नींद आए तो डॉक्टरी सलाह लें

स्लीप एपनिया यानी नींद से जुड़ी एक गंभीर बीमारी। स्लीप एपनिया की स्थिति में हमारी नींद कई बार टूटती है। कई स्थितियों में तो सांस रुक भी सकती है। स्लीप एपनिया की स्थिति में हम कई बार करवटें बदलते रहते हैं। आप जानकर हैरान होंगे- देश की 13 फीसदी आबादी ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित है। पुरुषों में 19.7%, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 7.4% है। स्लीप एपनिया की स्थिति में एक घंटे में तीस या इससे ज्यादा बार भी सांस का रुकना या करवटें बदलने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। यह एक ऐसा विकार है, जिससे नींद से जुड़ी और समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं।

उदाहरण के तौर पर- शोध बताते हैं, यदि आपकी रात की नींद एक घंटे भी कम हो जाए तो अगले दिन आपकी अलर्टनेस 32 फीसदी तक कम हो जाएगी। स्लीप एपनिया को समझने से पहले हमें, नींद को समझना जरूरी है। दरअसल, हमारी नींद तीन से चार चक्रों में पूरी होती है। हर चक्र लगभग पांच चरणों से गुजरता है। चौथा चरण सबसे गहरी नींद का होता है। पांचवां चरण REM या रैपिड आई मूवमेंट का चरण होता है। यह वो चरण होता है, जिसमें हम सपने भी देखते हैं। नींद के वक्त ही, हमारे शरीर में ग्रोथ हार्मोन प्रवाहित होते रहते हैं। जिनसे शरीर की दैनिक क्रियाएं होती हैं। नींद के दौरान शरीर का तापमान कम होता है। हृदयगति एवं ब्लड प्रेशर में कमी आती है जिससे दिल को आराम मिलता है।

स्लीप एपनिया में कई बार नींद टूटती है। जिससे इन सभी प्रक्रियाओं में खलल पड़ता है। अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक शोध के अनुसार, कोविड-19 के इस दौर में स्लीप एपनिया की शिकायत और बढ़ सकती है। शिरीष जौहरी, ईएनटी विशेषज्ञ, नेशनल हेल्थ केयर ग्रुप, सिंगापुर बता रहे हैं स्लीप एपनिया है क्या और यह किस तरह से हमारे शरीर पर प्रभाव डालता है।

6 सवाल-जवाब से समझिए स्लीप एपनिया और उससे जुड़े खतरों के बारे में

#1) स्लीप एपनिया आखिर है क्या?
यह एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर है। दरअसल, कुछ लोगों में पीठ के बल लेटने से गले की मुक्त पेशियां गुरुत्व के प्रभाव से गले के पिछले हिस्से की ओर फैल जाती हैं। और नींद की शिथिलता में श्वसन मार्ग के बीचों-बीच खिंच जाती हैं। इस खिंचावट से हवा का प्रवाह आंशिक या पूर्ण रूप से बाधित हो सकता है। इससे फेफड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। मस्तिष्क इस कमी को दस सेकंड तक ही सह सकता है। ऐसी स्थिति में दिमाग नींद को तोड़ देता है। जैसे ही नींद टूटती है- श्वसन मार्ग फिर खुल जाता है। बार-बार नींद आने और टूटने के इस चक्र को स्लीप एपनिया कहते हैं।

#2) इससे जुड़े प्रमुख लक्षण क्या हैं?

  • खर्राटे लेना इसका एक प्रमुख लक्षण हो सकता है। सोने में कठिनाई हो सकती है। मुंह सूखता है।
  • नींद के दौरान कुछ समय के लिए सांस रुक जाना।
  • सांस में कमी के साथ अचानक नींद का खुल जाना।
  • सुबह के समय सिर में दर्द महसूस होना। दिन में ज्यादा नींद का आना।
  • चूंकि, स्लीप एपनिया आपकी पूरी स्लीप साइकल को बिगाड़ देता है। ऐसे में चिड़चिड़ाहट होने लगती है। साथ ही एकाग्रता घटने लगती है।

#3) स्लीप एपनिया के कितने प्रकार हैं?

  • सेंट्रल : यह तब होता है जब हमारा मस्तिष्क सांस लेने वाली मांसपेशियों को निर्देश नहीं दे पाता। इसके चलते सांस लेने की प्रक्रिया अवरुद्ध होने लगती है।
  • ऑब्स्ट्रक्टिव : मस्तिष्क मांसपेशियों को सांस लेने के निर्देश तो देता है, लेकिन वायुमार्ग में किसी प्रकार की रुकावट के कारण मांसपेशियां सांस लेने में असफल हो जाती हैं।
  • मिक्स्ड : जब सेंट्रल और ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया दोनों एक साथ हो जाएं तो इसे मिक्स्ड स्लीप एपनिया कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है।

#4) स्लीप एपनिया का इलाज क्या है
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लिए सबसे बेहतर उपचार सीपीएपी (कांटीनुअस पॉजटिव एयरवेज प्रेशर) थेरेपी को माना जाता है। इसकी मदद से सांस लेने वाले वायुमार्गों को खुला रखने के लिए एयर प्रेशर का स्तेमाल किया जाता है। यह काफी सस्ता और प्रभावी है। हालांकि इसके स्थायी उपचार के लिए सर्जरी का उपयोग किया जाता है, लेकिन यह बहुत ही खर्चीला होता है। इसमें कुछ जोखिम भी हो सकते हैं।

#5) स्लीप एपनिया के खतरे क्या हैं?
स्लीप एपनिया एक खतरनाक स्वास्थ्य समस्या है। इससे खतरनाक ह्रदय रोग और लकवे जैसी गंभीर बीमारियां आपके शरीर पर हमला कर सकती हैं।

#6) खर्राटों का इससे क्या संबंध हैं?
खर्राटे स्लीप एपनिया का लक्षण हो सकते है लेकिन यह स्लीप एपनिया के बगैर भी हो सकते हैं। खर्राटों का होना प्राकृतिक है।

77 मिनट की ही गहरी नींद ले पाते हैं भारतीय

गहरी नींद के मामले में भारतीय सबसे ज्यादा पिछड़े हैं। पूरी रात में औसतन 77 मिनट की गहरी नींद ले पाते हैं। सिंगापुर, पेरू और हॉन्गकॉन्ग के लोग भी सबसे कम सोने वाले लोगों की लिस्ट में शामिल हैं। कम सोने से भारतीयों में स्लीप डिसऑर्डर आम है। ये आंकड़े फिटबिट द्वारा 1 अगस्त 2018 से 31 जुलाई 2019 के बीच किए गए अध्ययन के अनुसार।

खतरा सबसे कम नींद लेने वालों में भारतीयों का स्थान दुनिया में दूसरा

फिटबिट द्वारा 18 देशों में अध्ययन के अनुसार कम नींद के मामले में भारतीय दूसरे नंबर पर हैं। एक भारतीय औसतन 7 घंटे और 1 मिनट की नींद ले पाता है जबकि हमसे भी कम 6 घंटे 41 मिनट की नींद जापानी लेते हैं।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Coronavirus and Sleep Apnea and symptoms | What is Sleep Apnea? Know What Are The Waning Signs Causes Of Sleep Apnea


from दैनिक भास्कर,,1733

Comments

Trending

Health

Popular posts from this blog

मेष से मीन तक, हर राशि के लिए कुछ-ना-कुछ खास लेकर आ रहा है नया साल

जीवन मंत्र डेस्क. कुछ घंटों बाद साल 2020 शुरू हो जाएगा। आर्ट ऑफ लिविंग समूह के वैदिक धर्म संस्थान के एस्ट्रोलॉजर आशुतोष चावला ने अपने आध्यात्मिक विश्लेषण के जरिए 12 राशियों के लिए 2020 कैसा रहेगा, ये बताता है। किन राशियों को ग्रहों की चाल से नए साल में फायदा हो सकता है, किन लोगों को इस साल सावधानियां बरतनी पड़ सकती हैं, क्या आध्यात्मिक उपाय करने चाहिए, जानिए एस्ट्रोलॉजर आशुतोष चावला से। मेष मेष राशि वालों के लिए यह साल शुभ रहने वाला है। धर्म की वृद्धि होगी, तीर्थ यात्रा करेंगे, गुरु का सान्निध्य मिल सकता है। पदोन्नति हो सकती है। अगर आप लंबे समय से अपनी तरक्की के इंतजार में हैं, तो यह साल उचित सिद्ध होगा। कुछ नई शुरुआत करने के लिए भी यह साल बहुत उपयुक्त है। अगर आप किसी भी तरह के डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं - इंटरनेट, वेबसाइट, सोशल मीडिया पर, तो इस साल आपके सोशल मीडिया समुदाय को बढ़ाने के लिए भी बहुत अच्छा रहेगा। उपाय - हर रोज अपने गुरु द्वारा दिए गया मंत्र या फिर गुरु-मंत्र - ' गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः ...

आपका दिल कैसा है, यह 70% खाने पर निर्भर इसलिए अनाज, बींस, फल और सब्जियां खाएं, बेकरी प्रोडक्ट्स, चिप्स और रेडी टू ईट फूड अवॉयड करें

कोरोना की वजह से सभी की फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है। स्वास्थ्य के लिए नए खतरे सामने आ रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम, स्कूल-कॉलेज बंद होने से लोगों का सीटिंग टाइम बढ़ गया है। इससे हार्ट की बीमारी का खतरा डेढ़ गुना बढ़ गया है। इससे बचने के उपाय हैं रोज 30 मिनट हंसना और आधे घंटे व्यायाम करना। साथ ही दिल को हेल्दी रखने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं, ये भी जानना जरूरी है। आज वर्ल्ड हार्ट डे पर जानिए दिल से जुड़ी खास बातें : क्या खाएं सेहतमंद दिल के लिए नियमित दिनचर्या और एक्सरसाइज की हिस्सेदारी 70% है। हेल्दी हार्ट के लिए खाने में जैतून, नारियल और सरसों के तेल जैसे हेल्दी फैट्स शामिल करना चाहिए। साबुत अनाज, बींस, फलियां, फल और सब्जियों में फाइबर होता है। पालक में विटामिन के होता है। स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी में भी बैड कोलेस्ट्रॉल घटाने की क्षमता होती है। खाना बनाने में कम तेल का उपयोग करते हुए रोस्टिंग, स्टीमिंग का तरीका अपनाएं। आपके लिए क्या है नुकसानदायक रोज दिनभर में एक चम्मच से ज्यादा नमक न लें। जितनी शुगर शरीर को चाहिए वह भोजन में मिल जाती है। एडेड शुगर वाले ड्रिंक मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल...

टेक्सास की नताली का 'सेल्फी केक' सोशल मीडिया पर हुआ वायरल, हाइपर रियलिस्टिक केक के ट्रेंड को नई ऊंचाईयां देने के लिए ईजाद किया इसे

एक बेकर का सेल्फी केक देखकर आप यकीनन चौंक जाएंगे। बेकर की शक्ल से हूबहू मिलने वाला यह केक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस केक को जब सिर से लेकर चेहरे तक काटा गया तो भी लोगों ने सोशल मीडिया के जरिये तरह-तरह के रिएक्शन दिए। 'एवरीथिंग इज केक' ट्रेंड का ये दौर सोशल मीडिया पर उस वक्त चला जब कुछ क्रिएटिव बेकर्स ने रोजमर्रा के काम आने वाली चीजों को केक के रूप में पेश करना शुरू किया। सोशल मीडिया पर इस तरह के केक के वीडियोज और फोटोज खूब देखने को मिलते हैं। इन सब चीजों से अलग टेक्सास की एक बेकर ने 'हाइपर रियलिस्टिक केक' बनाया है। इस बेकर का नाम नताली साइडसर्फ है जो अपनी क्रिएटिविटी के जरिये केक के ट्रेंड को नई ऊंचाईयां देना चाहती हैं। इससे पहले भी उनके बेकरी क्रिएशन को सोशल मीडिया पर सराहा जा चुका है। इससे पहले वे अल्फाबेट नूडल्स सूप बनाने को लेकर चर्चित हुई थीं। केक में नताली का मुस्कुराता हुआ चेहरा बिल्कुल उनकी तरह ही दिख रहा है। इस केक को लेकर लोगों के कमेंट्स उस वक्त बढ़े जब नताली ने केक काटते हुए अपना वीडियो शेयर किया। सोशल मीडिया पर नताली की तारीफ करते हुए किसी ने...

4 महीने बाद मिथुन राशि में शुक्र का आना देश के लिए अच्छा संकेत; लेकिन मकर और धनु राशि वालों को रहना होगा संभलकर

1 अगस्त को शुक्र मिथुन राशि में आ जाएगा। इससे पहले ये ग्रह 30 मार्च से वृष राशि में था। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र ने बताया कि शुक्र ग्रह आमतौर पर एक राशि में 23 दिन तक रहता है। लेकिन इस बार 4 महीने बाद ये ग्रह राशि बदल रहा है और 31 अगस्त तक मिथुन राशि में ही रहेगा। फिर कर्क में चला जायेगा | शुक्र के अपने मित्र बुध की राशि मिथुन में आने से मौसमी बदलाव होंगे। शुक्र का राशि बदलना देश के लिए कई तरह से शुभ रहेगा। जिसका असर मौसम, देश-दुनिया और सभी राशियों पर पड़ेगा। शुक्र के राशि बदलने से मिथुन, वृष, मेष, मीन, कुम्भ, वृश्चिक, तुला और सिंह राशि वाले लोगों के लिए अच्छा समय रहेगा। इनके अलावा मकर और धनु राशि वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं कन्या और कर्क राशि वाले लोगों के लिए मिला-जुला समय रहेगा। शुक्र के राशि बदलने से देश-दुनिया पर प्रभाव देश में शैक्षणिक और धार्मिक गतिविधियां बढ़ेंगी। पूर्वी देशों और पूर्वी राज्यों में बारिश ज्यादा हो सकती है। बाढ़ की संभावना भी बन रही है। देश के अन्य हिस्सों में मौसम और वातावरण अनुकूल होगा। देश के दक्षिणी राज्यों के लिए समय अच्छा रहे...

ग्रह-नक्षत्रों के अनुसार कुछ लोगों के लिए ठीक नहीं है छुट्टी का दिन

जीवन मंत्र डेस्क. रविवार 29 दिसंबर यानी आज सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से हर्षण नाम का योग बन रहा है। वहीं श्रवण नक्षत्र के कारण गद नाम का एक अशुभ योग भी बन रहा है। इस तरह एक शुभ और एक अशुभ योग बनने से 12 में से 6 राशियों के लिए दिन ठीक नहीं है। वहीं अन्य 6 राशियों के लिए दिन शुभ रहेगा। एस्ट्रोलॉजर बेजान दारूवाला के अनुसार आज कुछ लोगों के सोचे हुए काम पूरे हो जाएंगे और कुछ लोग परेशान भी हो सकते हैं। आपकी राशि के लिए कुछ ऐसा रहेगा छुट्टी का दिन Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today According to planetary constellations, some people do not have a good day off from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2ZusB4O

आईआईटी दिल्ली ने बैक्टीरिया मारने वाला कपड़ा बनाया, अब कोरोना की टेस्टिंग होगी

हेल्थ डेस्क. आईआईटी दिल्ली ने ऐसा कपड़ा तैयार किया है, जो हानिकारक बैक्टीरिया को खुद खत्म कर देगा। इस कपड़े को कोरोना जैसेजानलेवा वारयस को मारने के लिए तैयार किया है, जो छूने से ही एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलते हैं। कपड़े पर बैक्टीरिया मारने के सभीटेस्ट सफल हो चुके हैं। हालांकि, फाइनल टेस्ट के लिए कपड़े का सैंपल एंटी वायरल लैब में भेजा जाएगा। जहां कोरोनावायरस से कपड़े के सैंपलका टेस्ट किया जाएगा। अस्पताल में इंफेक्शन से बचाएगा ये कपड़ा अस्पताल में होने वाले इंफेक्शन से बचाएगा। बैक्टीरिया मारने वाला कपड़े का फॉर्मूला ईजाद करने वाले टीम में वैज्ञानिक प्रोफेसर सम्राट मुखोपाध्याय, आईआईटी दिल्ली के पूर्व बीटेक छात्र यति गुप्ता, दिल्ली एम्स के कुछ डॉक्टर भी शामिल हैं। प्रोफेसर सम्राट मुखोपाध्याय ने बताया कि इसे फेबियोसिस इनोवेशन स्टार्टअप ने तैयार किया है। कपड़े पर की गई है केमिकल की कोटिंग बैक्टीरिया से टेस्टिंग में पाया गया कि यह कपड़ा 99.99 प्रतिशत बैक्टीरिया को मार देता है। इसकी खूबी यह है कि 30 बार धोने पर भी बैक्टीरिया इंफेक्शन प्रूफ फेब्रिक काम रहता है। कपड़े पर कोटिंग पैडिंग मैंगल ...

नींबू पानी,सेहतमंद नाश्ता और फलों से बनी स्मूदी दूर करेगी पार्टी हैंगओवर

हेल्थ डेस्क. नए साल का स्वागत एल्कोहल से न करें तो ही बेहतर होगा, क्योंकि यह सेहत के लिए हमेशा नुकसानदेह ही होती है। फिर भी अगर न्यू ईयर पार्टी में ज्यादा एल्कोहल लेने के कारण हैंगओवर की समस्या हो तो उससे बाहर आने या राहत दिलाने में ये आसान से टिप्स काफी मददगार हो सकते हैं। सीनियर कंसलटेंट डॉ. तरुण साहनी से जानिए हैंगओवर दूर करने के तरीके... सोने से पहले खूब पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन से बचे रहें। हैंगओवर का मुख्य कारण डिहाइड्रेशन ही होता है। जैसे ही आपकी नींद खुले, तब भी खूब पानी पिएं। नींबू पानी हैंगओवर का सबसे अच्छा उपचार है। इससे शरीर में नमक की सही मात्रा बनी रहती है और शरीर रिहाइड्रेट हो जाता है। नींबू से लिवर फंक्शन भी ठीक होता है। एल्कोहल के बाद नींबू पानी पी सकते हैं। नींबू के अलावा भी ताज़े खट्‌टेफलों जैसे संतरे, पाइनएप्पल का सेवन कर सकते हैं। इन फलों में मौजूद फ्रक्टोज़ और शुगर शरीर का संतुलन बनाने में मदद करते हैं। केले में 75 फीसदी पानी होता है। इससे डिहाइड्रेशन में आराम मिलता है। इसमें विटामिन सी और विटामिन बी 6 भी होते हैं जो फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज़ करते हैं। ...

राजा ने संत से कहा कि मैं आपको गांव और राजमहल दान में देता हूं, संत बोले कि ये तो प्रजा के हैं, तब राजा ने खुद को सेवक बनाने की बात कही

अहंकार की वजह से घर-परिवार और समाज में अपमानित होना पड़ सकता है। पुराने समय में रावण और दुर्योधन जैसे महायोद्धा भी अपने घमंड की वजह से खत्म हो गए। जानिए इस बुराई से जुड़ी लोक कथा... प्रचलित लोक कथा के अनुसार पुराने समय में एक राजा बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति का था। उसने अपने जन्मदिन पर सोचा कि मेरे पास इतनी धन-संपत्ति है। मैं किसी का भी जीवन बदल सकता हूं। इसीलिए आज किसी एक व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी करूंगा। राज्य की प्रजा राजा को शुभकामनाएं देने के लिए राजमहल पहुंची। प्रजा के साथ एक संत भी राजा को बधाई देने के लिए आए थे। राजा संत से मिलकर बहुत प्रसन्न हुआ। उसने संत से कहा कि गुरुदेव मेरे पास अपार धन-संपदा है, आज मैं आपकी सभी इच्छाएं पूरी करूंगा। आप जो चाहें मुझसे मांग सकते हैं। मैं आपकी हर बात पूरी करूंगा। संत ने कहा कि मैं तो वैरागी हूं, मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं है। अगर आप कुछ देना ही चाहते हैं तो अपनी इच्छा से मुझे कुछ भी दान दे सकते हैं। संत की बात सोचकर राजा सोचने लगा कि वह संत को क्या दे, राजा ने कहा कि मैं आपको एक गांव दे देता हूं। संत बोले कि नहीं महाराज, गांव तो वहां रह...

कोरोना से रिकवरी के बाद दिमाग में खून के 400 थक्के मिले, मरीज कोमा में पहुंचा; देश का पहला ऐसा मामला

कोरोना से जूझने के बाद दिमाग में खून के थक्के जमने का मामला सामने आया है। यह देश का पहला ऐसा मामला है। जम्मू के रहने वाले 55 साल के मिथिलेश लम्ब्रू कोरोना से रिकवरी के बाद कोमा में चल गए थे। डॉक्टर्स का कहना है, मरीज पोस्ट कोविड एनसेफेलाइटिस से जूझ रहा था। उसके दिमाग में खून के 400 थक्के मिले थे। मिथिलेश का इलाज दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में किया गया। कब, क्या हुआ, पढें पूरा मामला कुछ महीने पहले मिथिलेश कोरोना से संक्रमित हुए। लक्षण हल्के थे, इसलिए वो घर में ही क्वारेंटाइन हो गए। धीरे-धीरे हालत बिगड़ी। सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें जम्मू के अस्पताल में भर्ती किया गया। जांच में सामने आया कि कोरोना के कारण उन्हें निमोनिया हो गया। डॉक्टर्स ने इसे कोविड-निमोनिया बताया और मरीज को वेंटिलेटर रखा। मरीज डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से भी जूझ रहा था। नाजुक होती स्थिति को कंट्रोल करने के लिए स्थानीय डॉक्टर्स ने इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल की टीम से सम्पर्क किया। यहां से डॉक्टर्स की टीम बनाकर जम्मू भेजी गई। जो मरीज के ऑक्सीजन लेवल को कंट्रोल करते हुए उसे एयर एम्बुलेंस के...

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बनाई मोटापा कंट्रोल करने वाली डिवाइस, यह भूख का अहसास होने से रोकती है

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मोटापा कम करने वाली एक वायरलेस डिवाइस तैयार की है। यह डिवाइस मोटापे से जूझ रहे लोगों में पेट भरे होने का अहसास कराती है। 1 सेंटीमीटर आकार वाली इस डिवाइस को अमेरिका में टेक्सास की A&M यूनिवर्सिटी ने बनाया है। ऐसे काम करती यह डिवाइस इसे तैयार करने वाली टीम से जुड़े डॉ. सूंग पार्क कहते हैं, इस डिवाइस को इंप्लांट करने के लिए शरीर में छोटा सा चीरा लगाया जाता है। शरीर में पहुंचने के बाद इसे बाहर से रेडियो फ्रीक्वेंसी रिमोट के जरिए कंट्रोल किया जाता है। इस डिवाइस में लगी माइक्रोचिप और LED लाइट रिलीज करती है जो नर्व पर अपना ऐसा असर छोड़ती है कि पेट भरे होने का अहसास होता है। भूख अधिक नहीं लगती। इस तरह मोटापा कंट्रोल किया जाता है। किन लोगों को इस डिवाइस की जरूरत वैज्ञानिकों के मुताबिक, ऐसे लोग जो डाइटिंग और एक्सरसाइज के बाद भी वजन नहीं घटा पा रहे हैं। गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी की नौबत आ रही है। उनके पेट में इस डिवाइस को इंप्लांट कर सकते हैं। जो डाइजेस्टिव सिस्टम को कंट्रोल करेगा। सर्जरी के बाद रिकवरी में लम्बा समय लगता है। डिवाइस को तैयार करने वाले प्रो. सूंग पार्...