पुराणों में कहा गया है जमीन पर बैठकर खाना चाहिए खाना, आयुर्वेद कहता है इससे जल्दी पच जाता है भोजन और शरीर को मिलती है ताकत

पुराणों और स्मृति ग्रंथों के मुताबिक जमीन आसन बिछाकर बैठकर खाना खाना चाहिए। इसके कई फायदे भी बताए गए हैं। मार्कंडेय पुराण, महाभारत, ब्रह्म और कूर्म पुराण में बताया गया है कि नीचे बैठकर खाना खाने से सेहत अच्छी रहती है और उम्र भी बढ़ती है। वाराणसी के आयुर्वेद हॉस्पिटल के चिकित्सा अधिकारी वैद्य प्रशांत मिश्रा के मुताबिक इंसान की नाभि से जठराग्नि होती है। जमीन पर बैठकर खाना खाने से जठराग्नि तेज हो जाती है। जमीन पर बैठकर भोजन करने से खाना जल्दी पच जाता है। इस तरह बैठकर खाए गए खाने का पूरा फायदा शरीर को मिलता है।
- वैद्य मिश्रा बताते हैं कि खड़े होकर या कुर्सी पर बैठकर खाना खाते वक्त गुरुत्वाकर्षण बल से खाना तेजी से पेट में जाता है। जिससे शरीर खाने का रस और एंजाइम्स ठीक से नहीं ले पाता है। इसके उलट जब सुखासन यानी पालथी लगाकर खाना खाते हैं तो जिस तरह से पैर मोड़े जाते हैं उससे गुरुत्वाकर्षण बल कम हो जाता है और खाना धीरे-धीरे पेट के सभी हिस्सों से होकर गुजरता है। जिससे शरीर को उस खाने से ताकत मिलती है। शायद इसलिए ही विद्वानों ने जमीन पर बैठकर खाना खाने की परंपरा बनाई होगी।
नीचे बैठकर खाना खाने के फायदे
- जमीन पर बैठकर खाना खाने का मतलब सिर्फ भोजन करने से नहीं है। जब जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं तो उस तरीके को सुखासन की तरह देखा जाता है। इस आसन में खाना खाना सेहत के नजरिये से बहुत ही फायदेमंद है।
- इस आसन में बैठकर खाना खाने से मानसिक तनाव भी दूर होता है।
- इस तरह बैठकर भोजन करने से पाचन क्रिया अच्छी रहती हैं। मोटापा, अपच, कब्ज, एसिडिटी आदि पेट की बीमारियां नहीं होती हैं और मन शांत रहता है।
- जमीन पर बैठने के लिए घुटने मोड़ने पड़ते हैं। इससे घुटनों का भी बेहतर व्यायाम हो जाता है। इस तरह बैठने से हड्डियों में मौजूद हवा यानी वात निकल जाती है।
- इससे शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है और भोजन जल्दी पच जाता है जिससे हृदय को भी कम मेहनत करनी पड़ती है।
- पैर मोड़कर बैठने से आपकी शारीरिक मुद्रा में सुधार होता है। इससे मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है।
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