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विपरीत समय चल रहा हो तो खुद पर भरोसा बनाए रखें और परिवार का ध्यान रखें, धैर्य से बुरा वक्त बदल सकता है

मंगलवार, 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है। स्वामीजी का जन्म 1863 में कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में संन्यास धारण किया था। स्वामीजी ने शिकागो के धर्म सम्मेलन में ऐतिहासिक भाषण दिया था। इस भाषण के बाद वे दुनियाभर में काफी प्रसिद्ध हो गए थे।

जब स्वामी विवेकानंद विदेश में थे, तब उनकी पहचान एक धनी महिला से हो गई। वह स्वामीजी के विचारों से बहुत प्रभावित थी। महिला उनकी शिष्या बन गई।

एक दिन स्वामीजी अपनी शिष्या के साथ घोड़ा गाड़ी में घूम रहे थे। रास्ते में गाड़ी वाले ने सड़क किनारे गाड़ी रोकी। उस जगह एक महिला और कुछ बच्चे पहले से बैठे हुए थे। गाड़ी वाला उनके पास गया, बच्चों को प्यार किया और महिला को कुछ रुपए देकर लौट आया।

स्वामीजी और वह शिष्या ये सब ध्यान से देख रहे थे। जब गाड़ी वाला वापस आया तो महिला ने उससे पूछा कि आप किससे मिलने गए थे, वो महिला और बच्चे कौन हैं?

गाड़ी वाले ने कहा कि वह मेरी पत्नी और बच्चे थे। पहले मैं एक बैंक में मैनेजर था। मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं थी। जब बैंक को नुकसान हुआ तो मुझ पर कर्ज बहुत ज्यादा बढ़ गया। मेरी पूरी संपत्ति कर्ज उतारने में चली गई।

सबकुछ खत्म होने के बाद मैंने किसी तरह ये घोड़ा गाड़ी खरीदी है और छोटा सा घर ले रखा है। मैं लगातार मेहनत कर रहा हूं, जैसे ही मेरा वक्त थोड़ा ठीक होगा, मैं एक नया बैंक खोलूंगा। मुझे भरोसा है कि मैं जल्दी ही नए बैंक को विकसित कर सकता हूं।

ये बातें सुनकर विवेकानंद बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने महिला से कहा कि ये व्यक्ति एक दिन अपना लक्ष्य जरूर पूरा करेगा। जो लोग इतने बुरे समय में भी खुद पर भरोसा बनाए रखते हैं और परिवार का ध्यान रखते हैं, वे धैर्य के साथ काम करते हुए एक दिन अपना लक्ष्य जरूर प्राप्त कर लेते हैं।



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